• शास्त्रीय नृत्य से संबंधित उल्लेख भरतमुनि द्वारा लिखित 'नाट्यशास्त्र' एवं आचार्य नंदीकेश्वर द्वारा रचित 'अभिनय दर्पण' में मिलता है।

• भारतीय नृत्य परंपरा में शास्त्रीय नृत्य की 4 शैलियां प्रचलित थी - भारतनाट्यम, कथकली, कत्थक एवं मणिपुरी 

• कुचिपुड़ी, ओडीसी एवं मोहिनीअट्टम को शास्त्रीय नृत्य की मान्यता बाद में मिली।

सत्रिया नृत्य शैली को संगीत नाटक अकादमी द्वारा 15 नवंबर, 2000 को शास्त्रीनृत्य की सूची में सम्मिलित किया गया।

• इस प्रकार भारत में वर्तमान में 8 शास्त्रीय नृत्य प्रचलित हैं।


• भरतनाट्यम नृत्य :

० इस नृत्य शैली का विकास तमिलनाडु में हुआ है।

० बीसवीं सदी में रुक्मिणी देवी अरुंडेल और ई. कृष्णा अय्यर के प्रयासों से इस नृत्य को पर्याप्त सम्मान मिला।

० भारतनाट्यम में शारीरिक प्रक्रिया को तीन भागों में बांटा गया है- समभंग, अभंग और त्रिभंग।

० भारतनाट्यम के प्रमुख कलाकार हैं - पद्मा सुब्रमण्यम, यामिनी कृष्णमूर्ति, मृणालिनी साराभाई, मल्लिका साराभाई, मीनाक्षी सुंदरम पिल्लई, सोनल मानसिंह, स्वप्न सुंदरी, बाला सरस्वती, अलारमेल वल्ली।

• कथकली नृत्य :

० कथकली केरल का शास्त्रीय नृत्य है।

० इस नृत्य में पुराणों की कथाओं को आधार बनाया जाता है।

० कथकली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस कला में कई नृत्य और नाटकों की विशेषताओं को शामिल किया जा सकता है।

० कथकली अभिनय, नृत्य और संगीत तीन कलाओं से मिलकर बनी एक संपूर्ण कला है।

० यह एक मूकाभिनय है, जिसमें अभिनेता बोलता एवं गाता नहीं है।

० इसमें नर्तक के चेहरे पर हरा, लाल, पीला एवं काला रंग लगाया जाता है।


० इसमें हरा रंग सद्गुण एवं मर्यादा का सूचक होता है, लाल रंग पाप का सूचक, काला रंग तामसिक प्रवृत्ति को दर्शाता है, जबकि पीला रंग सात्विक और राजसिक स्वभाव का परिचायक है।

० कथकली के प्रमुख कलाकार हैं - कलाभंडलम रामन कुट्टी नायर, वेजटक्कल कृष्णान कुट्टी नायर, रीता गांगुली, सदानम कृष्णनकुट्टी।

• मोहिनीअट्टम :

० मोहिनी का आशय लुभाना और अट्टम का अर्थ है - ललित, अर्थात मोहिनीअट्टम का आशय लुभाने वाले नृत्य से है।

० यह केरल का शास्त्रीय नृत्य है।

० यह एकल महिला द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला नृत्य है।

० तकनीकी स्तर पर मोहिनीअट्टम, कथकली और भारतनाट्यम के बीच है।

मोहिनीअट्टम में इशारों की भाषा भारतनाट्यम के समान तथा आंखों की अभिव्यक्ति कथकली के समान है।

० मोहिनीअट्टम नृत्य को पुनर्जीवित करने में 3 लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है - स्वाति थिरुनल राम वर्मा, वल्लतोल नारायण मेनन, (कवि, केरल मंडलम संस्था के संस्थापक) और कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा (द मदर ऑफ मोहिनीअट्टम)।


० मोहिनीअट्टम के प्रमुख कलाकार हैं - जयाप्रभा मेनन, पल्लवी कृष्णन, विजयलक्ष्मी, हेमा मालिनी और गोपीका वर्मा।

• कुचिपुड़ी नृत्य :

० कुचीपुड़ी आंध्र प्रदेश की नृत्य शैली है।

कुचिपुड़ी नृत्य का सबसे अधिक लोकप्रिय रूप मटका नृत्य है, जिसमें एक नर्तकी मटके में पानी भरकर और उसे अपने सिर पर रखकर पीतल की थाली में पैर जमा करने नृत्य करती है।

० कुचिपुड़ी का संगीत शास्त्रीय कर्नाटक संगीत होता है।

० कुचिपुड़ी के प्रमुख कलाकार है - भावना रेड्डी, यामिनी रेड्डी, कौशल्या रेड्डी, राजा एवं राधा रेड्डी, वेम्पत्ति चेन्नासत्यम।

• ओडिसी नृत्य :

० यह उड़ीसा का शास्त्रीय नृत्य है। 

० उदयगिरि-खंडगिरि की गुफाओं से इस नृत्य के कुछ प्रारंभिक उदाहरण मिलते हैं।

० ब्रह्मेश्वर मंदिर के शिलालेखों एवं कोणार्क के सूर्य मंदिर के केंद्रीय कक्ष में इसका उल्लेख मिलता है।

० ओडिसी नृत्य में भगवान कृष्ण के बारे में प्रचलित कथाओं के आधार पर नृत्य किया जाता है।

० इस नृत्य में उड़ीसा के परिवेश और वहां के सबसे लोकप्रिय देवता भगवान जगन्नाथ की महिमा का गान किया जाता है। 

० ओडीसी नृत्य के प्रमुख कलाकार हैं - केलुचरण महापात्रा, संयुक्ता पाणिग्रही, सोनल मानसिंह, कुमकुम मोहंती, माधवी मुद्गल, अरुणा मोहंती, गीता महालिक, शेरोन लोवेन (यूएसए)।

• मणिपुरी नृत्य :

० यह नृत्य पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में प्रचलित है।

० इस नृत्य का मुख्य विषय रासलीला है।

० अन्य प्रकार के शास्त्रीय नृत्य से इसकी खासियत यह है कि इसमें घुंगरू नहीं पहने जाते हैं।

० आधुनिक समय में इसको पुनर्जीवित करने का श्रेय महाराजा भाग्यचंद्र को जाता है।

० गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने भी इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


० मणिपुरी के प्रमुख कलाकार हैं - गुरु नबकुमार, गुरु विपिन सिंह, झावेरी बहनें- नयाना, सुवर्णा, दर्शना और रंजना।

• कत्थक नृत्य :

० यह प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश में प्रचलित है। 

कत्थक का आशय; कथा कहने से है। इस नृत्य को नटवरी नृत्य के नाम से भी जाना जाता है।

० इस नृत्य की शास्त्रीय शैली को लेडी लीला सोखे ने पुनर्जीवित किया है।

पंडित बिरजू महाराज (लखनऊ घराना) इस नृत्य के प्रसिद्ध कलाकार थे।

• सत्रिया नृत्य :

वैष्णव संत शंकरदेव ने असम में इस नृत्य शैली को प्रचलित किया।

० इस नृत्य शैली को संगीत नाटक अकादमी द्वारा 15 नवंबर, 2000 को शास्त्रीय नृत्य की सूची में शामिल किया।

० इसमें विष्णु की पौराणिक कहानियों का वर्णन किया जाता है।

० सत्रिया के प्रमुख कलाकार हैं- मनीराम दत्ता मोकतर, इंदिरा पीपी बोरा, परमानंद बोरबयन, जतिन गोस्वामी, रामकृष्ण लालुकदार, कृष्णाश्री कश्यप, बापूराम बयन अत्ताई।

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• भारत के शास्त्रीय नृत्य :

० भारतनाट्यम - तमिलनाडु 

० कथकली - केरल 

० मोहनीअट्टम - केरल 

० कुचिपुड़ी - आंध्र प्रदेश 

० सत्रिया - असम 

० ओडिसी - ओडीशा 

० मणिपुरी - मणिपुर 

० कत्थक - उत्तर प्रदेश