• उल्लेख - भाग-2 (अनुच्छेद 5-11)
• नागरिकता से संबंधित कानून बनाने की पूरी शक्ति संसद को दी गई है।
• संसद ने सबसे पहले 1955 में नागरिकता अधिनियम पारित किया।
• नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 3-7 के अंतर्गत नागरिकता अर्जन के 5 तरीके; जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीयकरण एवं भारत में नया क्षेत्र के सम्मिलित होने पर हैं।
• भारतीय संविधान एकल नागरिकता का प्रावधान करता है।
• नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 8, 9 तथा 10 में नागरिकता समाप्ति
की तीन स्थितियां बताई गई है;
1. नागरिकता का परित्याग करने पर,
2. किसी अन्य देश की नागरिकता स्वीकार करने पर
3. भारत सरकार द्वारा नागरिकता से वंचित किए जाने पर।
• भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15, 16, 19, 29, 30 केवल नागरिकों को प्राप्त है।
• जबकि अनुच्छेद 14, 20, 21, 21A, 22, 23, 24, 25, 26, 27 और 28 भारतीय नागरिकों के साथ-साथ विदेशियों को भी प्राप्त है।
• लोकसभा एवं राज्य विधानसभा के निर्वाचन हेतु मतदान का अधिकार व
सदस्यता का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त है।
• अनुच्छेद 5 : संविधान के प्रारंभ पर अधिवास द्वारा नागरिकता।
• अनुच्छेद 6 : पाकिस्तान से प्रव्रजन/माइग्रेशन करके आए व्यक्तियों को नागरिकता।
• अनुच्छेद 7 : पाकिस्तान को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों की नागरिकता के अधिकार।
• अनुच्छेद 8 : भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति की नागरिकता।
• अनुच्छेद 9 : किसी अन्य देश की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने पर
भारत की नागरिकता स्वत: समाप्त हो जाएगी।
• अनुच्छेद 10 : किसी नागरिक की नागरिकता का अधिकार संसदीय विधान के अलावा किसी अन्य रीति से नहीं छीना जा सकता है।
• अनुच्छेद 11 : नागरिकता से संबंधित विधान बनाने की शक्ति संसद को होगी।
• अनिवासी भारतीय (NRI) -
• अनिवासी भारतीय, भारत के नागरिक होते हैं और भारतीय पासपोर्ट धारण करते हैं किंतु यह नौकरी या व्यवसाय के लिए भारत से बाहर रहते हैं।
• इन्हें मतदान का पूरा अधिकार है।
• भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) -
• ये भारत के नागरिक नहीं होते।
• ये वे व्यक्ति हैं जो स्वयं या जिनके पूर्वज भारत के नागरिक रहे हैं, किंतु वर्तमान में ये किसी अन्य देश के नागरिक हैं।
• इन्हें मताधिकार एवं चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है।
• समुद्रपारीय भारतीय नागरिक (OCI) -
• ये विदेशी नागरिक होते हैं तथा इनका निवास विदेश में ही होता है।
• इन्हें जीवन पर्यंत वीजा की सुविधा उपलब्ध है।
• 9 जनवरी, 2015 की अधिसूचना के द्वारा PIO तथा OCI कार्ड धारकों की भिन्नता समाप्त कर दी गई है तथा अब PIO कार्ड जारी नहीं किए जाएंगे।
• अब सभी PIO कार्डों को OCl कार्डों का दर्जा प्राप्त होगा।

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